सूर्य ग्रह

आत्मा, पिता और अधिकार।

संक्षेप में: सूर्य आत्मा, पिता, अधिकार, शासन, आत्मविश्वास और उद्देश्य की दृढ़ता का कारक है। इसकी विंशोत्तरी दशा 6 वर्ष की होती है, और यह हर राशि में लगभग एक महीना रहता है।

  • दशा 6 वर्ष
  • उच्च मेष
  • नीच तुला
  • स्वराशि सिंह
  • वार रविवार
  • रत्न माणिक्य

सूर्य एक नज़र में

अन्य नाम
रवि, आदित्य
स्वभाव
स्वभाव से पाप ग्रह (सौम्य, राजसी पाप ग्रह)
कारकत्व
आत्मा, पिता, अधिकार, शासन, आत्मविश्वास और उद्देश्य की दृढ़ता
स्वामी राशियाँ
सिंह
उच्च राशि
मेष
नीच राशि
तुला
मूलत्रिकोण
सिंह
मित्र
चंद्रमा, मंगल, गुरु
सम
बुध
शत्रु
शुक्र, शनि
महादशा
6 वर्ष (विंशोत्तरी)

पारंपरिक उपाय

वार
रविवार
रंग
लाल, नारंगी
देवता
सूर्य देव
मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
दान
गेहूँ, गुड़, तांबा
रत्न
माणिक्य (विकल्प: लाल तामड़ा), सोने या तांबे में, अनामिका उँगली में

रत्न तभी पहनें जब किसी ज्योतिषी ने आपकी कुंडली जाँच ली हो। मंत्र और दान सबके लिए हैं। रत्नों के बारे में · मंत्रों के बारे में

बलवान और निर्बल राशियाँ

♈︎मेष♉︎वृष♊︎मिथुन♋︎कर्क♌︎सिंह♍︎कन्या♎︎तुला♏︎वृश्चि♐︎धनु♑︎मकर♒︎कुंभ♓︎मीनउच्चस्वराशिमूलत्रिकोणनीच

आज आकाश में

♈︎मेष♉︎वृषभ♊︎मिथुन♋︎कर्क♌︎सिंह♍︎कन्या♎︎तुला♏︎वृश्चिक♐︎धनु♑︎मकर♒︎कुंभ♓︎मीनआज21 अक्टूबरसूचंमंबुगुशुवशवराके

वैदिक ज्योतिष में सूर्य

संस्कृत में सूर्य को रवि और आदित्य भी कहा जाता है। शास्त्रों में सूर्य नवग्रहों की सभा के राजा हैं। सूर्य आत्मा का कारक है, यानी व्यक्ति के भीतर का वह स्थिर भाव कि वह कौन है।

परंपरा के अनुसार सूर्य नैसर्गिक पाप ग्रह है, पर सौम्य और राजसी: उसका ताप नुकसान से ज़्यादा व्यक्ति को निखारता है और सत्य, कर्तव्य और आत्मसम्मान की माँग करता है। सूर्य के बहुत पास आए ग्रह अस्त कहलाते हैं, मानो राजा के तेज में उनका प्रकाश समा गया हो।

सूर्य किन बातों का कारक है

सूर्य का कारकत्व स्वयं, पिता, अधिकार वाले लोग, सरकार, आत्मविश्वास और उद्देश्य से आने वाली ऊर्जा तक फैला है। मान-सम्मान, नेतृत्व और अपने आचरण से कमाई गई प्रतिष्ठा भी सूर्य से ही देखी जाती है।

सूर्य कहाँ बलवान होता है: उच्च, नीच और स्वराशि

सूर्य एक ही राशि, सिंह, का स्वामी है, और सिंह ही उसकी मूलत्रिकोण राशि भी है। सूर्य मेष में उच्च का होता है, शास्त्रों के अनुसार 10 अंश पर परम उच्च, और तुला में नीच का। मेष में उसका साहस और पहल सबसे ताज़ा रहते हैं; तुला, जो शुक्र की साझेदारी वाली राशि है, वहाँ सीख यह है कि आदेश से नहीं, न्याय और सहयोग से नेतृत्व किया जाए।

सूर्य के मित्र और शत्रु ग्रह

पराशर की नैसर्गिक मैत्री में चंद्रमा, मंगल और गुरु सूर्य के मित्र हैं, बुध सम है, और शुक्र व शनि शत्रु हैं। मित्र की राशि में सूर्य सहजता से काम करता है; शत्रु की राशि में उसे अपनी बात कहने में अधिक प्रयास लगता है।

सूर्य के नक्षत्र

कृत्तिका, उत्तर फाल्गुनी और उत्तराषाढ़ा के स्वामी सूर्य हैं। तीनों में अपने स्वामी जैसी स्पष्टता और कर्तव्य-भावना दिखती है। जिसका जन्म चंद्रमा के इनमें से किसी नक्षत्र में रहते हुआ हो, उसका जीवन सूर्य की महादशा से शुरू होता है।

सूर्य की महादशा

विंशोत्तरी दशा में सूर्य की महादशा 6 वर्ष की होती है, नौ ग्रहों में सबसे छोटी; यह शुक्र के बाद और चंद्रमा से पहले आती है। इस समय पहचान, करियर में स्थान, मान-सम्मान और पिता या बड़ों से संबंध सामने आने की प्रवृत्ति रहती है। सूर्य अच्छी स्थिति में हो तो परंपरा के अनुसार यह ज़िम्मेदारी लेने और आगे आने का समय है; दबाव में हो तो अधिकारियों से टकराव हो सकता है, जिसे विनम्रता और ईमानदार मेहनत अक्सर शांत कर देती है।

बारह भावों में सूर्य

सूर्य जिस भाव में बैठता है, वहाँ स्वयं, अधिकार और दिखने की इच्छा लाता है। राशि, दृष्टियाँ और पूरी कुंडली इन प्रवृत्तियों को हमेशा बदलती हैं।

  • पहला भाव: अपने आप का गहरा बोध और नेतृत्व की चाह
  • दूसरा भाव: परिवार का गौरव; अधिकार भरी वाणी
  • तीसरा भाव: साहस, पहल और आत्मविश्वास भरी आवाज़
  • चौथा भाव: घर में दृढ़ इच्छा; नरम होना सीखना
  • पाँचवाँ भाव: रचनात्मक गौरव और शिक्षा में नेतृत्व
  • छठा भाव: मेहनत से विरोध पर जीत
  • सातवाँ भाव: प्रबल व्यक्तित्व वाला जीवनसाथी; बराबरी की सीख
  • आठवाँ भाव: गुप्त बातों में रुचि; पद-प्रतिष्ठा में अचानक बदलाव
  • नौवाँ भाव: पिता, गुरुजनों और धर्म के प्रति आदर
  • दसवाँ भाव: दिशा बल से सबसे बलवान भाव, करियर और सार्वजनिक भूमिका के लिए
  • ग्यारहवाँ भाव: बड़ों और प्रभावशाली मित्रों से लाभ
  • बारहवाँ भाव: अंतर्मुखी स्वभाव; सेवा या विदेश में काम

सूर्य के पारंपरिक उपाय

सूर्य का दिन रविवार है, रंग लाल और नारंगी, दिशा पूर्व और अंक 1। उगते सूर्य को जल चढ़ाना (सूर्य अर्घ्य) सबसे सरल साधना है। सूर्य का मंत्र है ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः, जिसे अक्सर रविवार को 108 बार जपा जाता है। गेहूँ, गुड़ या ताँबे का दान पारंपरिक माना जाता है।

सूर्य का रत्न माणिक्य है, जिसे परंपरा के अनुसार सोने या ताँबे में जड़वाकर अनामिका उँगली में पहना जाता है; लाल गार्नेट (तामड़ा) इसका उपरत्न है। किसी ज्योतिषी से कुंडली दिखाकर ही रत्न धारण करें, क्योंकि सूर्य को बल देना हर कुंडली के लिए ठीक नहीं होता; मंत्र और दान सभी के लिए उचित हैं।

प्रश्न

वैदिक ज्योतिष में सूर्य शुभ ग्रह है या पाप ग्रह?

परंपरा में सूर्य को नैसर्गिक पाप ग्रह माना जाता है, पर सौम्य और राजसी। उसके फल इस पर निर्भर करते हैं कि वह किन भावों का स्वामी है और कहाँ बैठा है।

कुंडली में सूर्य किसका प्रतीक है?

आत्मा, स्वयं, पिता, अधिकार, सरकार और आत्मविश्वास का। सूर्य दिखाता है कि व्यक्ति कहाँ चमकना और ज़िम्मेदारी उठाना चाहता है।

सूर्य के लिए सबसे अच्छा भाव कौन सा है?

शास्त्र सूर्य को दसवें भाव, यानी करियर के भाव, में दिशा बल देते हैं। पहला, नौवाँ और ग्यारहवाँ भाव भी उसके लिए अनुकूल माने जाते हैं।

अस्त ग्रह किसे कहते हैं?

जो ग्रह सूर्य के बहुत पास आ जाए, उसे अस्त कहते हैं। परंपरा के अनुसार उसके कारकत्व सूर्य के तेज से दबे हुए माने जाते हैं।

आज सूर्य

आज सूर्य: तुला 3.5°, चित्रा।