वैदिक ज्योतिष सीखें: कहाँ से शुरू करें

वैदिक ज्योतिष की बुनियादी बातें, एक-एक करके: बारह राशियों से लेकर अपनी कुंडली पढ़ने तक। हर कदम उन पन्नों को खोलता है जो उसे समझाते हैं।

  1. कदम 1

    बारह राशियाँ

    राशिचक्र के 30° के बारह भाग, मेष से मीन तक: हर राशि का तत्व, स्वभाव और स्वामी ग्रह हर कुंडली की भाषा हैं।

  2. कदम 2

    नवग्रह

    सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और छाया ग्रह राहु-केतु: हर ग्रह क्या दर्शाता है, कहाँ बलवान है और कहाँ कमज़ोर।

  3. कदम 3

    बारह भाव

    जीवन के क्षेत्र (स्वयं, धन, भाई-बहन, घर, संतान, स्वास्थ्य, विवाह आदि), लग्न से गिने जाते हैं।

  4. कदम 4

    27 नक्षत्र

    चंद्रमा के 27 नक्षत्र, हर एक 13°20′ का, अपने स्वामी और देवता के साथ: दशा और मिलान का आधार।

  5. कदम 5

    आपका लग्न

    जन्म के समय पूर्व में उदय होती राशि: यही भाव तय करती है, और ज्योतिषी सबसे पहले इसी को देखते हैं।

  6. कदम 6

    अपनी कुंडली पढ़ें

    अपनी कुंडली बनाएँ और ऊपर की हर बात उसमें खोजें: आपकी राशियाँ, भावों और नक्षत्रों में ग्रह, आपके वर्ग और योग।

  7. कदम 7

    समय: दशा और गोचर

    विंशोत्तरी दशा बताती है कि आप किस ग्रह की अवधि में हैं; गोचर बताता है कि ग्रह अभी आपकी कुंडली में कहाँ चल रहे हैं।

  8. कदम 8

    दोष और उपाय

    मांगलिक दोष, साढ़े साती और कालसर्प: ये क्या हैं और कब निरस्त होते हैं; और पारंपरिक रत्न और मंत्र।

  9. कदम 9

    कुंडली मिलान

    गुण मिलान के आठ कूट, 36 में से, और उनके साथ देखे जाने वाले दोष।

  10. कदम 10

    आगे: केपी और अंक ज्योतिष

    कृष्णमूर्ति पद्धति (केपी) भावों के आरंभ बिंदु और उनके उप-स्वामी पढ़ती है; अंक ज्योतिष जन्मतिथि पढ़ता है।

प्रश्न

शुरुआत करने वाला वैदिक ज्योतिष कहाँ से सीखना शुरू करे?

बारह राशियों, नवग्रहों और बारह भावों से: हर फलादेश इन तीनों को जोड़कर होता है। फिर नक्षत्र और अपना लग्न सीखें, और हर बात अपनी कुंडली में खोजें।

ज्योतिष सीखने में कितना समय लगता है?

बुनियादी बातें (राशियाँ, ग्रह, भाव और नक्षत्र) कुछ हफ़्तों के नियमित अध्ययन में आ जाती हैं। कुंडली अच्छी तरह पढ़ना असली कुंडलियों पर वर्षों के अभ्यास से आता है, इसलिए बहुत से लोग किसी अनुभवी ज्योतिषी से सीखते रहते हैं।

वैदिक और पश्चिमी ज्योतिष में क्या अंतर है?

वैदिक ज्योतिष निरयन राशिचक्र (अयनांश के साथ, यहाँ लाहिड़ी), चंद्र राशि और 27 नक्षत्रों का उपयोग करता है और दशा से समय बताता है; पश्चिमी ज्योतिष सायन राशिचक्र और सूर्य राशि का उपयोग करता है।