चंद्रमा ग्रह
मन, माता और भावनाएँ।
संक्षेप में: चंद्रमा मन, माता, भावनाएँ, जनता, सुख और पोषण का कारक है। इसकी विंशोत्तरी दशा 10 वर्ष की होती है, और यह हर राशि में लगभग ढाई दिन रहता है।
- दशा 10 वर्ष
- उच्च वृषभ
- नीच वृश्चिक
- स्वराशि कर्क
- वार सोमवार
- रत्न मोती
चंद्रमा एक नज़र में
- अन्य नाम
- सोम, इंदु
- स्वभाव
- शुक्ल पक्ष में (बढ़ता हुआ) शुभ, कृष्ण पक्ष में कम शुभ
- कारकत्व
- मन, माता, भावनाएँ, जनता, सुख और पोषण
- स्वामी राशियाँ
- कर्क
- उच्च राशि
- वृषभ
- नीच राशि
- वृश्चिक
- मूलत्रिकोण
- वृषभ
- मित्र
- सूर्य, बुध
- सम
- मंगल, गुरु, शुक्र, शनि
- शत्रु
- कोई नहीं
- महादशा
- 10 वर्ष (विंशोत्तरी)
पारंपरिक उपाय
- वार
- सोमवार
- रंग
- सफ़ेद
- देवता
- शिव
- मंत्र
- ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः
- दान
- चावल, दूध, सफ़ेद वस्त्र
- रत्न
- मोती (विकल्प: चंद्रकांत मणि), चाँदी में, कनिष्ठा उँगली में
रत्न तभी पहनें जब किसी ज्योतिषी ने आपकी कुंडली जाँच ली हो। मंत्र और दान सबके लिए हैं। रत्नों के बारे में · मंत्रों के बारे में
बलवान और निर्बल राशियाँ
आज आकाश में
वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा
संस्कृत में चंद्रमा को चंद्र, सोम और इंदु कहा जाता है। नवग्रहों की सभा में सूर्य राजा हैं और चंद्रमा उनके साथ रानी। वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा का स्थान केंद्रीय है: जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था, वही आपकी राशि है, और जिस नक्षत्र से गुज़र रहा था, वही आपका जन्म नक्षत्र।
परंपरा के अनुसार शुक्ल पक्ष का उजला चंद्रमा शुभ ग्रह है, और कृष्ण पक्ष का क्षीण चंद्रमा कम शुभ। इसलिए उसका बल सूर्य से उसकी दूरी पर निर्भर करता है, और एक ही राशि पूर्णिमा और अमावस्या के जन्म में काफ़ी अलग अनुभव दे सकती है।
चंद्रमा किन बातों का कारक है
चंद्रमा का कारकत्व मन, माता, भावनाएँ, जनता, सुख-सुविधा और पोषण तक फैला है। वह दिखाता है कि व्यक्ति कैसे महसूस करता है, क्या याद रखता है, सुरक्षा कहाँ खोजता है और लोगों से कितनी आसानी से जुड़ता है। चंद्रमा सबसे तेज़ चलता है, हर राशि में लगभग ढाई दिन, इसलिए गोचर और राशिफल में रोज़ के जीवन का स्वर भी उसी से तय होता है।
चंद्रमा कहाँ बलवान होता है: उच्च, नीच और स्वराशि
चंद्रमा कर्क राशि का स्वामी है। वह वृषभ में उच्च का होता है, शास्त्रों के अनुसार 3 अंश पर परम उच्च, और वृषभ ही उसकी मूलत्रिकोण राशि भी है। वृश्चिक में चंद्रमा नीच का होता है। वृषभ में मन स्थिर और संतुष्ट रहता है; वृश्चिक, जो गहराई और तीव्रता की राशि है, वहाँ भावनाएँ प्रबल होती हैं, और सीख यह है कि जो महसूस हो रहा है उसे दबाए बिना शांति पाई जाए।
चंद्रमा के मित्र ग्रह
पराशर की नैसर्गिक मैत्री में सूर्य और बुध चंद्रमा के मित्र हैं, और मंगल, गुरु, शुक्र व शनि सम। चंद्रमा किसी ग्रह को शत्रु नहीं मानता, जो माँ के स्वभाव की सुंदर छवि है। फिर भी बुध चंद्रमा को शत्रु मानता है, इसलिए यह मित्रता दोनों ओर से नहीं है।
चंद्रमा के नक्षत्र
रोहिणी, हस्त और श्रवण के स्वामी चंद्रमा हैं। पौराणिक कथा में रोहिणी चंद्रमा की सबसे प्रिय है, उर्वर और सुंदर; हस्त हाथों के कौशल का नक्षत्र है; श्रवण सुनने और सीखने का। जिसका जन्म चंद्रमा के इनमें से किसी नक्षत्र में रहते हुआ हो, उसका जीवन चंद्र महादशा से शुरू होता है।
चंद्रमा की महादशा
विंशोत्तरी दशा में चंद्र महादशा 10 वर्ष की होती है; यह सूर्य के बाद और मंगल से पहले आती है। इस समय ध्यान घर, माता, भावनात्मक सुरक्षा, सार्वजनिक जीवन और दूसरों की देखभाल की ओर जाने की प्रवृत्ति रहती है। चंद्रमा बलवान और उजला हो तो परंपरा के अनुसार यह सुख, लोकप्रियता और जीवन में ठहराव का समय है; चंद्रमा कमज़ोर हो तो मन के उतार-चढ़ाव और चिंता पर अधिक ध्यान देना पड़ सकता है, और नियमित दिनचर्या सहायक होती है।
बारह भावों में चंद्रमा
चंद्रमा जिस भाव में बैठता है, वहाँ भावना, देखभाल और जनता से जुड़ाव लाता है। उसका शुक्ल या कृष्ण पक्ष का होना उतना ही मायने रखता है जितना भाव।
- पहला भाव: कोमल, ग्रहणशील और बदलता स्वभाव
- दूसरा भाव: मीठी वाणी और परिवार को महत्व देने वाला मन
- तीसरा भाव: सक्रिय, जिज्ञासु मन; भाई-बहनों से निकट संबंध
- चौथा भाव: दिशा बल से सबसे बलवान भाव, घर, माता और मन की शांति के लिए
- पाँचवाँ भाव: कल्पनाशील, स्नेही मन; बच्चों से प्रेम
- छठा भाव: सेवा और रोज़ के काम में भावनात्मक मेहनत
- सातवाँ भाव: देखभाल करने वाला जीवनसाथी और साथ की चाह
- आठवाँ भाव: गहरा, निजी मन; अचानक बदलाव के प्रति संवेदनशीलता
- नौवाँ भाव: भक्ति, आस्था और तीर्थयात्रा की ओर खिंचाव
- दसवाँ भाव: जनता, देखभाल या पोषण से जुड़ा काम
- ग्यारहवाँ भाव: लोगों से और बड़े दायरे से लाभ
- बारहवाँ भाव: स्वप्निल, अंतर्मुखी मन; एकांत में शांति
चंद्रमा के पारंपरिक उपाय
चंद्रमा का दिन सोमवार है, रंग सफ़ेद, दिशा उत्तर-पश्चिम (वायव्य) और अंक 2। उसके देवता शिव हैं, जो मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करते हैं, और सोमवार को शिव की पूजा सबसे प्रचलित साधना है। चंद्रमा का मंत्र है ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्राय नमः। सोमवार को चावल, दूध या सफ़ेद वस्त्र का दान, और अपनी माता की सेवा, पारंपरिक उपाय माने जाते हैं।
चंद्रमा का रत्न मोती है, जिसे परंपरा के अनुसार चाँदी में जड़वाकर कनिष्ठा उँगली में पहना जाता है; चंद्रकांत मणि इसका उपरत्न है। किसी ज्योतिषी से कुंडली दिखाकर ही रत्न धारण करें, क्योंकि चंद्रमा को बल देना हर कुंडली के लिए ठीक नहीं होता; मंत्र और दान सभी के लिए उचित हैं।
प्रश्न
वैदिक ज्योतिष में राशिफल चंद्र राशि से क्यों देखा जाता है?
वैदिक ज्योतिष मन को चंद्रमा से पढ़ता है, इसलिए जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था, वही आपकी राशि बनती है। दैनिक राशिफल और साढ़े साती जैसे शनि के काल इसी से देखे जाते हैं।
क्या चंद्रमा शुभ ग्रह है?
परंपरा में शुक्ल पक्ष का उजला चंद्रमा शुभ माना जाता है, और कृष्ण पक्ष का चंद्रमा कम शुभ। उसका बल सूर्य से उसकी दूरी पर निर्भर करता है।
रोहिणी नक्षत्र का स्वामी कौन है?
रोहिणी के स्वामी चंद्रमा हैं; हस्त और श्रवण भी चंद्रमा के ही नक्षत्र हैं।
कुंडली में कमज़ोर चंद्रमा का क्या अर्थ है?
कमज़ोर चंद्रमा संवेदनशील और बदलते मन की प्रवृत्ति दिखाता है, जिसे अधिक आराम और नियमित दिनचर्या चाहिए। शास्त्र इसे देखभाल का क्षेत्र मानते हैं, कोई तय परिणाम नहीं।
आज चंद्रमा
आज चंद्रमा: कुंभ 0.8°, धनिष्ठा।