प्रदोष व्रत 2028 की तिथियाँ

हर चंद्र पक्ष का तेरहवाँ दिन (त्रयोदशी), भगवान शिव को समर्पित; इसका नाम वार से होता है (सोमवार को सोम प्रदोष, शनिवार को शनि प्रदोष)।

नई दिल्ली, भारत के लिए तिथियाँ और समय

2028 में हर प्रदोष व्रत

दिनांकनामतिथिपूजा का समय
रविवार, 9 जनवरी 2028रवि प्रदोष व्रत17:56, 9 जनवरी – 15:36, 10 जनवरी17:41 – 20:23
रविवार, 23 जनवरी 2028रवि प्रदोष व्रत14:23, 23 जनवरी – 16:09, 24 जनवरी17:52 – 20:32
मंगलवार, 8 फ़रवरी 2028भौम प्रदोष व्रत06:52, 8 फ़रवरी – 03:46, 9 फ़रवरी18:05 – 20:41
मंगलवार, 22 फ़रवरी 2028भौम प्रदोष व्रत08:08, 22 फ़रवरी – 10:44, 23 फ़रवरी18:16 – 20:47
बुधवार, 8 मार्च 2028बुध प्रदोष व्रत17:27, 8 मार्च – 14:02, 9 मार्च18:25 – 20:52
गुरुवार, 23 मार्च 2028गुरु प्रदोष व्रत02:56, 23 मार्च – 05:34, 24 मार्च18:34 – 20:55
शुक्रवार, 7 अप्रैल 2028शुक्र प्रदोष व्रत01:52, 7 अप्रैल – 22:33, 7 अप्रैल18:42 – 20:58
शनिवार, 22 अप्रैल 2028शनि प्रदोष व्रत21:04, 21 अप्रैल – 22:56, 22 अप्रैल18:51 – 21:02
शनिवार, 6 मई 2028शनि प्रदोष व्रत08:48, 6 मई – 06:06, 7 मई18:59 – 21:06
रविवार, 21 मई 2028रवि प्रदोष व्रत13:19, 21 मई – 14:02, 22 मई19:08 – 21:12
रविवार, 4 जून 2028रवि प्रदोष व्रत15:29, 4 जून – 13:49, 5 जून19:16 – 21:17
मंगलवार, 20 जून 2028भौम प्रदोष व्रत03:21, 20 जून – 02:48, 21 जून19:22 – 21:22
मंगलवार, 4 जुलाई 2028भौम प्रदोष व्रत23:17, 3 जुलाई – 22:57, 4 जुलाई19:23 – 21:24
बुधवार, 19 जुलाई 2028बुध प्रदोष व्रत15:22, 19 जुलाई – 13:37, 20 जुलाई19:19 – 21:22
बुधवार, 2 अगस्त 2028बुध प्रदोष व्रत09:24, 2 अगस्त – 10:25, 3 अगस्त19:11 – 21:17
शुक्रवार, 18 अगस्त 2028शुक्र प्रदोष व्रत01:43, 18 अगस्त – 23:00, 18 अगस्त18:57 – 21:08
शुक्रवार, 1 सितंबर 2028शुक्र प्रदोष व्रत22:31, 31 अगस्त – 00:35, 2 सितंबर18:42 – 20:57
शनिवार, 16 सितंबर 2028शनि प्रदोष व्रत10:51, 16 सितंबर – 07:30, 17 सितंबर18:24 – 20:45
शनिवार, 30 सितंबर 2028शनि प्रदोष व्रत14:34, 30 सितंबर – 17:05, 1 अक्टूबर18:08 – 20:33
रविवार, 15 अक्टूबर 2028रवि प्रदोष व्रत19:17, 15 अक्टूबर – 15:45, 16 अक्टूबर17:51 – 20:21
सोमवार, 30 अक्टूबर 2028सोम प्रदोष व्रत08:51, 30 अक्टूबर – 11:08, 31 अक्टूबर17:37 – 20:12
मंगलवार, 14 नवंबर 2028भौम प्रदोष व्रत03:41, 14 नवंबर – 00:35, 15 नवंबर17:28 – 20:07
बुधवार, 29 नवंबर 2028बुध प्रदोष व्रत04:14, 29 नवंबर – 05:42, 30 नवंबर17:24 – 20:06
बुधवार, 13 दिसंबर 2028बुध प्रदोष व्रत12:56, 13 दिसंबर – 10:50, 14 दिसंबर17:25 – 20:09
शुक्रवार, 29 दिसंबर 2028शुक्र प्रदोष व्रत23:21, 28 दिसंबर – 23:37, 29 दिसंबर17:33 – 20:17

कैसे रखा जाता है

दिन भर का उपवास और सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में शिव की पूजा।

यह व्रत क्यों रखा जाता है

प्रदोष सूर्यास्त के बाद की संध्या है, और प्रदोष व्रत त्रयोदशी को रखा जाता है, हर चंद्र पक्ष के तेरहवें दिन, जब यह संध्या उसमें पड़ती है। शिव पुराण और स्कंद पुराण इस समय की महिमा बताते हैं: परंपरा कहती है कि प्रदोष में शिव कैलाश पर आनंद से नृत्य करते हैं, और देवता उनकी पूजा के लिए एकत्र होते हैं।

व्रत की विधि, एक-एक चरण

  1. सामर्थ्य के अनुसार दिन भर उपवास, अक्सर फल और दूध के साथ।
  2. सूर्यास्त से पहले स्नान और स्वच्छ वस्त्र।
  3. सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में जल, दूध, दही, शहद और घी से शिवलिंग का अभिषेक, और बेलपत्र, फूल व दीपक अर्पित।
  4. ॐ नमः शिवाय का जाप, और उस वार की प्रदोष व्रत कथा का पाठ।
  5. नंदी की पूजा भी: कई मंदिरों में पहले नंदी का अभिषेक होता है।
  6. शाम की पूजा के बाद व्रत खोला जाता है।

उपवास

अधिकतर लोग सूर्योदय से शाम की पूजा तक प्रदोष का उपवास रखते हैं, दिन में फल, दूध और जल के साथ, और पूजा के बाद सादे सात्विक भोजन से व्रत खोलते हैं। कुछ लोग इसे बिना जल रखते हैं। अपने स्वास्थ्य के अनुसार उपवास रखें: बच्चे, बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएँ और अस्वस्थ लोग परंपरा से हल्का उपवास रखते हैं, और किसी बीमारी में पहले अपने डॉक्टर से पूछ लें।

वार के अनुसार प्रदोष

सोम प्रदोष (सोमवार)
सबसे अधिक रखा जाने वाला, क्योंकि सोमवार शिव का अपना दिन है।
भौम प्रदोष (मंगलवार)
मंगल (भौम) के नाम पर।
बुध प्रदोष (बुधवार)
बुध ग्रह के नाम पर।
गुरु प्रदोष (गुरुवार)
बृहस्पति (गुरु) के नाम पर।
शुक्र प्रदोष (शुक्रवार)
शुक्र ग्रह के नाम पर।
शनि प्रदोष (शनिवार)
विशेष भक्ति से रखा जाता है, शिव के साथ शनि की पूजा भी।
रवि प्रदोष (रविवार)
सूर्य (रवि) के नाम पर।

पूरे भारत में

तमिलनाडु और कर्नाटक में प्रदोषम शिव मंदिरों का सबसे व्यस्त समय होता है: पहले नंदी का अभिषेक होता है, और भक्त सोमसूत्र प्रदक्षिणा में मंदिर की परिक्रमा करते हैं। उत्तर भारत और महाराष्ट्र में यह व्रत घर और शिव मंदिरों में रखा जाता है, और सोम व शनि प्रदोष पर सबसे अधिक भक्त आते हैं।

प्रश्न

प्रदोष व्रत क्या है?

हर चंद्र पक्ष का तेरहवाँ दिन (त्रयोदशी), भगवान शिव को समर्पित; इसका नाम वार से होता है (सोमवार को सोम प्रदोष, शनिवार को शनि प्रदोष)।

प्रदोष व्रत का पालन कैसे करते हैं?

दिन भर का उपवास और सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में शिव की पूजा।

अलग-अलग पंचांगों में प्रदोष व्रत की तिथि अलग क्यों होती है?

हर पंचांग किसी एक स्थान के लिए गणना करता है: सूर्योदय (या चंद्रोदय, या शाम) के आसपास शुरू या समाप्त होने वाली तिथि अलग-अलग शहरों में अलग-अलग दिन पड़ सकती है। ये तिथियाँ दिखाए गए शहर के लिए हैं; ऊपर अपना शहर चुनें।

प्रदोष काल कब होता है?

सूर्यास्त के बाद की संध्या, सामान्य प्रथा में सूर्यास्त से लगभग डेढ़ घंटा। व्रत उस दिन रखा जाता है जिसका प्रदोष काल त्रयोदशी में पड़ता है; तिथियों की तालिका में आपके शहर का समय है।

प्रदोष महीने में दो बार क्यों होता है?

त्रयोदशी हर चंद्र मास के दोनों पक्षों में आती है, इसलिए वर्ष में लगभग 24 प्रदोष व्रत होते हैं; कई लोग दोनों रखते हैं, कुछ केवल कृष्ण पक्ष वाला।

सोम प्रदोष क्या है?

सोमवार, शिव के दिन, पड़ने वाला प्रदोष, जिसे कई लोग प्रदोष व्रतों में सबसे शुभ मानते हैं।

प्रदोष पर शिव को क्या अर्पित किया जाता है?

अभिषेक के लिए जल और दूध, बेलपत्र, सफ़ेद फूल, चंदन, दीपक और धूप; कई लोग नंदी को भी अर्पित करते हैं। परंपरा में शिव पूजा में हल्दी, कुमकुम और केतकी के फूल नहीं चढ़ाए जाते।