मासिक शिवरात्रि 2032 की तिथियाँ
हर कृष्ण पक्ष का चौदहवाँ दिन, हर महीने शिव की रात; फाल्गुन वाली महाशिवरात्रि है।
नई दिल्ली, भारत के लिए तिथियाँ और समय
2032 में हर मासिक शिवरात्रि
| दिनांक | नाम | तिथि | पूजा का समय |
|---|---|---|---|
| रविवार, 11 जनवरी 2032 | मासिक शिवरात्रि | 08:46, 11 जनवरी – 05:21, 12 जनवरी | 00:01 – 00:55 |
| सोमवार, 9 फ़रवरी 2032 | मासिक शिवरात्रि | 19:36, 9 फ़रवरी – 15:48, 10 फ़रवरी | 00:09 – 01:01 |
| बुधवार, 10 मार्च 2032 | महाशिवरात्रि | 04:51, 10 मार्च – 01:19, 11 मार्च | 00:06 – 00:55 |
| गुरुवार, 8 अप्रैल 2032 | मासिक शिवरात्रि | 13:15, 8 अप्रैल – 10:33, 9 अप्रैल | 23:59 – 00:45 |
| शुक्रवार, 7 मई 2032 | मासिक शिवरात्रि | 21:41, 7 मई – 20:11, 8 मई | 23:56 – 00:38 |
| रविवार, 6 जून 2032 | मासिक शिवरात्रि | 06:59, 6 जून – 06:48, 7 जून | 23:59 – 00:40 |
| सोमवार, 5 जुलाई 2032 | मासिक शिवरात्रि | 17:47, 5 जुलाई – 18:48, 6 जुलाई | 00:05 – 00:46 |
| बुधवार, 4 अगस्त 2032 | मासिक शिवरात्रि | 06:33, 4 अगस्त – 08:30, 5 अगस्त | 00:06 – 00:48 |
| गुरुवार, 2 सितंबर 2032 | मासिक शिवरात्रि | 21:31, 2 सितंबर – 23:58, 3 सितंबर | 23:58 – 00:43 |
| शनिवार, 2 अक्टूबर 2032 | मासिक शिवरात्रि | 14:30, 2 अक्टूबर – 16:50, 3 अक्टूबर | 23:46 – 00:34 |
| सोमवार, 1 नवंबर 2032 | मासिक शिवरात्रि | 08:43, 1 नवंबर – 10:14, 2 नवंबर | 23:38 – 00:30 |
| बुधवार, 1 दिसंबर 2032 | मासिक शिवरात्रि | 02:47, 1 दिसंबर – 02:53, 2 दिसंबर | 23:43 – 00:37 |
| गुरुवार, 30 दिसंबर 2032 | मासिक शिवरात्रि | 19:17, 30 दिसंबर – 17:49, 31 दिसंबर | 23:56 – 00:51 |
कैसे रखा जाता है
उपवास, शिव की पूजा, और मध्यरात्रि (निशीथ) में मुख्य पूजा।
यह व्रत क्यों रखा जाता है
मासिक शिवरात्रि, हर मास की शिव की रात, कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को, अमावस्या से पहले की रात होती है। शिव पुराण शिवरात्रि व्रत की महिमा बताता है; फाल्गुन (अमांत पंचांग में माघ) की शिवरात्रि महाशिवरात्रि है, और वर्ष भर मासिक शिवरात्रि रखना अपने आप में एक परंपरा है, जो अक्सर महाशिवरात्रि से शुरू की जाती है।
व्रत की विधि, एक-एक चरण
- स्नान, संकल्प, और दिन भर उपवास।
- शाम और रात में जल, दूध, दही, शहद और घी से शिवलिंग का अभिषेक, बेलपत्र, धतूरा और फूलों के साथ।
- ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जाप, और सामर्थ्य के अनुसार रात भर जागकर पूजा।
- मध्यरात्रि के आसपास निशीथ काल में मुख्य पूजा; आपके शहर का समय ऊपर की तालिका में है।
- अगली सुबह स्नान और पूजा के बाद व्रत खोला जाता है।
उपवास
अधिकतर लोग फल, दूध और जल के साथ दिन-रात उपवास रखते हैं और अगली सुबह खोलते हैं। कड़ाई से रखने वाले अन्न, नमक और प्याज छोड़ते हैं। अपने स्वास्थ्य के अनुसार उपवास रखें: बच्चे, बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएँ और अस्वस्थ लोग परंपरा से हल्का उपवास रखते हैं, और किसी बीमारी में पहले अपने डॉक्टर से पूछ लें।
वर्ष की शिवरात्रियाँ
- महाशिवरात्रि
- फाल्गुन (अमांत पंचांग में माघ) की महान शिवरात्रि, वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण।
- सावन शिवरात्रि
- उत्तर भारत में श्रावण की शिवरात्रि, जब कांवड़ यात्री शिव मंदिरों में गंगाजल चढ़ाते हैं।
पूरे भारत में
दक्षिण में इसे मास शिवरात्रि कहते हैं, शिव मंदिरों में रात भर अभिषेक के साथ। उत्तर में सावन शिवरात्रि पर कांवड़ यात्रा पूरी होती है। महाराष्ट्र में भक्त त्र्यंबकेश्वर, भीमाशंकर, घृष्णेश्वर, औंढा नागनाथ और परली वैजनाथ ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करते हैं, सबसे अधिक महाशिवरात्रि पर।
प्रश्न
मासिक शिवरात्रि क्या है?
हर कृष्ण पक्ष का चौदहवाँ दिन, हर महीने शिव की रात; फाल्गुन वाली महाशिवरात्रि है।
मासिक शिवरात्रि का पालन कैसे करते हैं?
उपवास, शिव की पूजा, और मध्यरात्रि (निशीथ) में मुख्य पूजा।
अलग-अलग पंचांगों में मासिक शिवरात्रि की तिथि अलग क्यों होती है?
हर पंचांग किसी एक स्थान के लिए गणना करता है: सूर्योदय (या चंद्रोदय, या शाम) के आसपास शुरू या समाप्त होने वाली तिथि अलग-अलग शहरों में अलग-अलग दिन पड़ सकती है। ये तिथियाँ दिखाए गए शहर के लिए हैं; ऊपर अपना शहर चुनें।
मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या अंतर है?
मासिक शिवरात्रि हर मास, कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आती है। महाशिवरात्रि फाल्गुन (अमांत पंचांग में माघ) की शिवरात्रि है, वर्ष की महान रात; वह भी एक मासिक शिवरात्रि है।
शिवरात्रि की पूजा मध्यरात्रि में क्यों होती है?
परंपरा के अनुसार शिव मध्यरात्रि में अनंत ज्योति-स्तंभ (लिंगोद्भव) के रूप में प्रकट हुए थे, इसलिए मुख्य पूजा मध्यरात्रि के आसपास निशीथ काल में होती है।
मासिक शिवरात्रि कौन रख सकता है?
कोई भी। कई लोग महाशिवरात्रि से शुरू करके एक वर्ष तक हर मास इसे व्रत के रूप में रखते हैं, और परंपरा में कई अविवाहित महिलाएँ भी इसे रखती हैं।