एकादशी 2085 की तिथियाँ
हर चंद्र पक्ष का ग्यारहवाँ दिन, भगवान विष्णु को समर्पित; वर्ष में 24 एकादशियाँ होती हैं, हर एक का अपना नाम (अधिक मास वाले वर्ष में 26)।
नई दिल्ली, भारत के लिए तिथियाँ और समय
2085 में हर एकादशी
| दिनांक | नाम | तिथि | पारण (अगले दिन) |
|---|---|---|---|
| शनिवार, 6 जनवरी 2085 | पौष पुत्रदा एकादशी | 18:26, 5 जनवरी – 19:34, 6 जनवरी | 07:14 – 09:19 |
| सोमवार, 22 जनवरी 2085 | षटतिला एकादशी | 16:57, 21 जनवरी – 14:52, 22 जनवरी | 07:12 – 09:20 |
| सोमवार, 5 फ़रवरी 2085 | जया एकादशी | 11:09, 4 फ़रवरी – 13:23, 5 फ़रवरी | 07:05 – 09:17 |
| मंगलवार, 20 फ़रवरी 2085 | विजया एकादशी | 04:21, 20 फ़रवरी – 01:45, 21 फ़रवरी | 06:59 – 09:09 |
| बुधवार, 7 मार्च 2085 | आमलकी एकादशी | 06:10, 6 मार्च – 08:53, 7 मार्च | 06:37 – 08:59 |
| गुरुवार, 22 मार्च 2085 | पापमोचनी एकादशी | 13:04, 21 मार्च – 10:20, 22 मार्च | 06:20 – 07:20 |
| गुरुवार, 5 अप्रैल 2085 | कामदा एकादशी | 01:43, 5 अप्रैल – 04:07, 6 अप्रैल | 13:39 – 16:10 |
| शुक्रवार, 20 अप्रैल 2085 | वरूथिनी एकादशी | 19:46, 19 अप्रैल – 17:17, 20 अप्रैल | 05:49 – 08:25 |
| शनिवार, 5 मई 2085 | मोहिनी एकादशी | 20:03, 4 मई – 21:35, 5 मई | 05:35 – 08:16 |
| शनिवार, 19 मई 2085 | अपरा एकादशी | 01:37, 19 मई – 23:48, 19 मई | 05:27 – 08:11 |
| सोमवार, 4 जून 2085 | निर्जला एकादशी | 12:11, 3 जून – 12:35, 4 जून | 05:22 – 08:09 |
| सोमवार, 18 जून 2085 | योगिनी एकादशी | 08:02, 17 जून – 07:16, 18 जून | 05:23 – 06:57 |
| मंगलवार, 3 जुलाई 2085 | देवशयनी एकादशी | 01:54, 3 जुलाई – 01:10, 4 जुलाई | 06:48 – 08:15 |
| मंगलवार, 17 जुलाई 2085 | कामिका एकादशी | 16:26, 16 जुलाई – 16:53, 17 जुलाई | 05:35 – 08:20 |
| गुरुवार, 2 अगस्त 2085 | श्रावण पुत्रदा एकादशी | 13:21, 1 अगस्त – 11:38, 2 अगस्त | 05:44 – 08:25 |
| बुधवार, 15 अगस्त 2085 | अजा एकादशी | 03:49, 15 अगस्त – 05:26, 16 अगस्त | 13:44 – 16:21 |
| शुक्रवार, 31 अगस्त 2085 | पार्श्व एकादशी | 22:54, 30 अगस्त – 20:27, 31 अगस्त | 05:59 – 08:31 |
| शुक्रवार, 14 सितंबर 2085 | इंदिरा एकादशी | 18:37, 13 सितंबर – 20:59, 14 सितंबर | 06:06 – 08:34 |
| शनिवार, 29 सितंबर 2085 | पापांकुशा एकादशी · वैष्णव एकादशी: अगले दिन | 07:02, 29 सितंबर – 04:11, 30 सितंबर | 13:22 – 15:45 |
| रविवार, 14 अक्टूबर 2085 | रमा एकादशी | 12:25, 13 अक्टूबर – 14:58, 14 अक्टूबर | 06:21 – 08:39 |
| सोमवार, 29 अक्टूबर 2085 | देवउठनी एकादशी | 14:25, 28 अक्टूबर – 11:39, 29 अक्टूबर | 06:31 – 08:44 |
| मंगलवार, 13 नवंबर 2085 | उत्पन्ना एकादशी | 08:13, 12 नवंबर – 10:20, 13 नवंबर | 06:42 – 08:51 |
| मंगलवार, 27 नवंबर 2085 | मोक्षदा एकादशी | 22:04, 26 नवंबर – 19:55, 27 नवंबर | 06:54 – 09:00 |
| बुधवार, 12 दिसंबर 2085 | सफला एकादशी | 04:36, 12 दिसंबर – 05:49, 13 दिसंबर | 13:17 – 15:21 |
| बुधवार, 26 दिसंबर 2085 | पौष पुत्रदा एकादशी · वैष्णव एकादशी: अगले दिन | 07:04, 26 दिसंबर – 05:58, 27 दिसंबर | 13:24 – 15:28 |
कैसे रखा जाता है
एकादशी पर अन्न का उपवास, विष्णु की पूजा, और अगली सुबह हरि वासर के बाद पारण के समय में उपवास खोलना।
यह व्रत क्यों रखा जाता है
एकादशी वैष्णव परंपरा का सबसे अधिक रखा जाने वाला व्रत है। पद्म पुराण वर्ष की हर एकादशी को उसका अपना नाम और कथा देता है, जो श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई, और इस दिन को भगवान विष्णु का प्रिय बताता है। व्यवहार में यह महीने में दो बार संयम का दिन है: हल्का भोजन, अधिक प्रार्थना, और खान-पान व वाणी पर ध्यान।
व्रत की विधि, एक-एक चरण
- एक दिन पहले, दशमी को, सूर्यास्त से पहले एक बार हल्का भोजन, बिना चावल के।
- एकादशी को सुबह जल्दी स्नान, भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण के सामने दीपक और फूल, और एक दिन पहले तोड़े गए तुलसी पत्र (परंपरा में एकादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती)।
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या विष्णु सहस्रनाम का जाप, और उस एकादशी की कथा पढ़ना या सुनना।
- सामर्थ्य के अनुसार दिन-रात उपवास; कई लोग रात को कीर्तन या भजन करते हैं।
- द्वादशी को पारण के समय व्रत खोला जाता है: सूर्योदय के बाद, हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) बीत जाने पर। आपके शहर का समय ऊपर की तालिका में है।
उपवास
परंपरा में एकादशी को अन्न, सबसे पहले चावल, और दालें छोड़ी जाती हैं। पूरा व्रत बिना जल (निर्जला) या केवल जल पर रखा जाता है; अधिकतर लोग फलाहार रखते हैं: फल, दूध, मेवे और व्रत का भोजन जैसे साबूदाना, आलू, और कुट्टू, राजगिरा या सिंघाड़े का आटा, सेंधा नमक के साथ। अपने स्वास्थ्य के अनुसार उपवास रखें: बच्चे, बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएँ और अस्वस्थ लोग परंपरा से हल्का उपवास रखते हैं, और किसी बीमारी में पहले अपने डॉक्टर से पूछ लें।
वर्ष की 24 एकादशियाँ
| मास | कृष्ण पक्ष | शुक्ल पक्ष |
|---|---|---|
| चैत्र | पापमोचनी एकादशी | कामदा एकादशी |
| वैशाख | वरूथिनी एकादशी | मोहिनी एकादशी |
| ज्येष्ठ | अपरा एकादशी | निर्जला एकादशी |
| आषाढ़ | योगिनी एकादशी | देवशयनी एकादशी |
| श्रावण | कामिका एकादशी | श्रावण पुत्रदा एकादशी |
| भाद्रपद | अजा एकादशी | पार्श्व एकादशी |
| आश्विन | इंदिरा एकादशी | पापांकुशा एकादशी |
| कार्तिक | रमा एकादशी | देवउठनी एकादशी |
| मार्गशीर्ष | उत्पन्ना एकादशी | मोक्षदा एकादशी |
| पौष | सफला एकादशी | पौष पुत्रदा एकादशी |
| माघ | षटतिला एकादशी | जया एकादशी |
| फाल्गुन | विजया एकादशी | आमलकी एकादशी |
| अधिक मास | परमा एकादशी | पद्मिनी एकादशी |
मास के नाम उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार हैं, जिसमें मास पूर्णिमा के बाद शुरू होता है। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण के अमांत पंचांग में कृष्ण पक्ष की एकादशी पिछले मास में आती है: जैसे पापमोचनी वहाँ फाल्गुन कृष्ण की है। अधिक मास वाले वर्ष में पद्मिनी और परमा जुड़कर 26 एकादशियाँ होती हैं।
पूरे भारत में
एकादशी पूरे भारत में इसी नाम से रखी जाती है। महाराष्ट्र में आषाढ़ी एकादशी (देवशयनी) और कार्तिकी एकादशी (प्रबोधिनी) पंढरपुर वारी के बड़े दिन हैं, जब लाखों वारकरी पैदल विठ्ठल के दर्शन को जाते हैं। दक्षिण में धनु सौर मास (दिसंबर से जनवरी) की शुक्ल एकादशी, वैकुंठ एकादशी, पर श्रीरंगम और तिरुमला जैसे विष्णु मंदिरों में वैकुंठ द्वार खुलता है। देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू होता है, जो देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी पर पूरा होता है।
प्रश्न
एकादशी क्या है?
हर चंद्र पक्ष का ग्यारहवाँ दिन, भगवान विष्णु को समर्पित; वर्ष में 24 एकादशियाँ होती हैं, हर एक का अपना नाम (अधिक मास वाले वर्ष में 26)।
एकादशी का पालन कैसे करते हैं?
एकादशी पर अन्न का उपवास, विष्णु की पूजा, और अगली सुबह हरि वासर के बाद पारण के समय में उपवास खोलना।
अलग-अलग पंचांगों में एकादशी की तिथि अलग क्यों होती है?
हर पंचांग किसी एक स्थान के लिए गणना करता है: सूर्योदय (या चंद्रोदय, या शाम) के आसपास शुरू या समाप्त होने वाली तिथि अलग-अलग शहरों में अलग-अलग दिन पड़ सकती है। ये तिथियाँ दिखाए गए शहर के लिए हैं; ऊपर अपना शहर चुनें।
एकादशी को क्या खाया जाता है?
फल, दूध, मेवे और व्रत का भोजन जैसे साबूदाना, आलू और कुट्टू, राजगिरा या सिंघाड़े का आटा, सेंधा नमक के साथ। अन्न, सबसे पहले चावल, और दालें छोड़ी जाती हैं; कुछ लोग केवल जल पर या बिना जल (निर्जला) व्रत रखते हैं।
एकादशी का व्रत कब खोला जाता है?
अगले दिन द्वादशी को, पारण के समय: सूर्योदय के बाद, हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) बीत जाने पर, और द्वादशी समाप्त होने से पहले। यह समय स्थान के साथ बदलता है; तिथियों की तालिका में आपके शहर का समय है।
कुछ पंचांगों में एकादशी एक दिन बाद क्यों होती है?
जब एकादशी दो सूर्योदयों को छूती है, या दशमी भोर तक रहती है, तो पंचांगों में एक दिन का अंतर हो सकता है। यह पेज अधिकतर पंचांगों का स्मार्त नियम मानता है; इस्कॉन जैसे वैष्णव समुदाय प्रायः अगले दिन व्रत रखते हैं। अपने परिवार या मंदिर की परंपरा का पालन करें।
वर्ष में कितनी एकादशियाँ होती हैं?
चौबीस, हर चंद्र मास के दोनों पक्षों में एक-एक। अधिक मास वाले वर्ष में पद्मिनी और परमा एकादशी जुड़कर 26 होती हैं।
सबसे महत्वपूर्ण एकादशी कौन-सी है?
परंपरा में हर एकादशी प्रिय है, पर बिना जल रखी जाने वाली निर्जला एकादशी को सभी 24 का पुण्य देने वाली कहा जाता है, और देवशयनी व देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी चातुर्मास का आरंभ और अंत हैं।