एकादशी 2084 की तिथियाँ

हर चंद्र पक्ष का ग्यारहवाँ दिन, भगवान विष्णु को समर्पित; वर्ष में 24 एकादशियाँ होती हैं, हर एक का अपना नाम (अधिक मास वाले वर्ष में 26)।

नई दिल्ली, भारत के लिए तिथियाँ और समय

2084 में हर एकादशी

दिनांकनामतिथिपारण (अगले दिन)
मंगलवार, 4 जनवरी 2084सफला एकादशी15:17, 3 जनवरी – 12:34, 4 जनवरी07:14 – 09:19
मंगलवार, 18 जनवरी 2084पौष पुत्रदा एकादशी16:25, 17 जनवरी – 19:01, 18 जनवरी07:13 – 09:21
बुधवार, 2 फ़रवरी 2084षटतिला एकादशी00:54, 2 फ़रवरी – 22:11, 2 फ़रवरी07:07 – 09:18
गुरुवार, 17 फ़रवरी 2084जया एकादशी13:17, 16 फ़रवरी – 15:52, 17 फ़रवरी06:56 – 09:12
गुरुवार, 2 मार्च 2084विजया एकादशी · वैष्णव एकादशी: अगले दिन09:10, 2 मार्च – 06:52, 3 मार्च13:42 – 16:02
शनिवार, 18 मार्च 2084आमलकी एकादशी09:50, 17 मार्च – 11:40, 18 मार्च06:25 – 08:50
शनिवार, 1 अप्रैल 2084पापमोचनी एकादशी16:49, 31 मार्च – 15:13, 1 अप्रैल06:09 – 08:39
रविवार, 16 अप्रैल 2084कामदा एकादशी04:04, 16 अप्रैल – 04:37, 17 अप्रैल13:38 – 16:13
रविवार, 30 अप्रैल 2084वरूथिनी एकादशी00:40, 30 अप्रैल – 23:58, 30 अप्रैल05:53 – 08:19
मंगलवार, 16 मई 2084मोहिनी एकादशी18:53, 15 मई – 18:05, 16 मई05:28 – 08:12
मंगलवार, 30 मई 2084अपरा एकादशी09:39, 29 मई – 09:59, 30 मई05:23 – 08:09
बुधवार, 14 जून 2084निर्जला एकादशी · वैष्णव एकादशी: अगले दिन06:18, 14 जून – 04:24, 15 जून13:45 – 16:33
बुधवार, 28 जून 2084योगिनी एकादशी20:39, 27 जून – 22:03, 28 जून05:26 – 08:13
शुक्रवार, 14 जुलाई 2084देवशयनी एकादशी15:02, 13 जुलाई – 12:28, 14 जुलाई05:33 – 08:19
शुक्रवार, 28 जुलाई 2084कामिका एकादशी10:17, 27 जुलाई – 12:33, 28 जुलाई05:41 – 08:23
शनिवार, 12 अगस्त 2084श्रावण पुत्रदा एकादशी22:03, 11 अगस्त – 19:16, 12 अगस्त05:49 – 08:28
शनिवार, 26 अगस्त 2084अजा एकादशी02:36, 26 अगस्त – 05:14, 27 अगस्त13:39 – 16:13
रविवार, 10 सितंबर 2084पार्श्व एकादशी04:22, 10 सितंबर – 01:43, 11 सितंबर07:01 – 08:33
सोमवार, 25 सितंबर 2084इंदिरा एकादशी20:56, 24 सितंबर – 23:11, 25 सितंबर06:11 – 08:35
मंगलवार, 10 अक्टूबर 2084पापांकुशा एकादशी10:57, 9 अक्टूबर – 08:47, 10 अक्टूबर06:19 – 06:42
बुधवार, 25 अक्टूबर 2084रमा एकादशी15:56, 24 अक्टूबर – 17:12, 25 अक्टूबर06:29 – 08:43
बुधवार, 8 नवंबर 2084देवउठनी एकादशी18:48, 7 नवंबर – 17:29, 8 नवंबर06:39 – 08:49
शुक्रवार, 24 नवंबर 2084उत्पन्ना एकादशी10:14, 23 नवंबर – 10:13, 24 नवंबर06:51 – 08:58
गुरुवार, 7 दिसंबर 2084मोक्षदा एकादशी05:01, 7 दिसंबर – 04:52, 8 दिसंबर13:15 – 15:20
शनिवार, 23 दिसंबर 2084सफला एकादशी02:48, 23 दिसंबर – 01:35, 24 दिसंबर07:10 – 09:14

कैसे रखा जाता है

एकादशी पर अन्न का उपवास, विष्णु की पूजा, और अगली सुबह हरि वासर के बाद पारण के समय में उपवास खोलना।

यह व्रत क्यों रखा जाता है

एकादशी वैष्णव परंपरा का सबसे अधिक रखा जाने वाला व्रत है। पद्म पुराण वर्ष की हर एकादशी को उसका अपना नाम और कथा देता है, जो श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई, और इस दिन को भगवान विष्णु का प्रिय बताता है। व्यवहार में यह महीने में दो बार संयम का दिन है: हल्का भोजन, अधिक प्रार्थना, और खान-पान व वाणी पर ध्यान।

व्रत की विधि, एक-एक चरण

  1. एक दिन पहले, दशमी को, सूर्यास्त से पहले एक बार हल्का भोजन, बिना चावल के।
  2. एकादशी को सुबह जल्दी स्नान, भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण के सामने दीपक और फूल, और एक दिन पहले तोड़े गए तुलसी पत्र (परंपरा में एकादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती)।
  3. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या विष्णु सहस्रनाम का जाप, और उस एकादशी की कथा पढ़ना या सुनना।
  4. सामर्थ्य के अनुसार दिन-रात उपवास; कई लोग रात को कीर्तन या भजन करते हैं।
  5. द्वादशी को पारण के समय व्रत खोला जाता है: सूर्योदय के बाद, हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) बीत जाने पर। आपके शहर का समय ऊपर की तालिका में है।

उपवास

परंपरा में एकादशी को अन्न, सबसे पहले चावल, और दालें छोड़ी जाती हैं। पूरा व्रत बिना जल (निर्जला) या केवल जल पर रखा जाता है; अधिकतर लोग फलाहार रखते हैं: फल, दूध, मेवे और व्रत का भोजन जैसे साबूदाना, आलू, और कुट्टू, राजगिरा या सिंघाड़े का आटा, सेंधा नमक के साथ। अपने स्वास्थ्य के अनुसार उपवास रखें: बच्चे, बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएँ और अस्वस्थ लोग परंपरा से हल्का उपवास रखते हैं, और किसी बीमारी में पहले अपने डॉक्टर से पूछ लें।

वर्ष की 24 एकादशियाँ

मासकृष्ण पक्षशुक्ल पक्ष
चैत्रपापमोचनी एकादशीकामदा एकादशी
वैशाखवरूथिनी एकादशीमोहिनी एकादशी
ज्येष्ठअपरा एकादशीनिर्जला एकादशी
आषाढ़योगिनी एकादशीदेवशयनी एकादशी
श्रावणकामिका एकादशीश्रावण पुत्रदा एकादशी
भाद्रपदअजा एकादशीपार्श्व एकादशी
आश्विनइंदिरा एकादशीपापांकुशा एकादशी
कार्तिकरमा एकादशीदेवउठनी एकादशी
मार्गशीर्षउत्पन्ना एकादशीमोक्षदा एकादशी
पौषसफला एकादशीपौष पुत्रदा एकादशी
माघषटतिला एकादशीजया एकादशी
फाल्गुनविजया एकादशीआमलकी एकादशी
अधिक मासपरमा एकादशीपद्मिनी एकादशी

मास के नाम उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार हैं, जिसमें मास पूर्णिमा के बाद शुरू होता है। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण के अमांत पंचांग में कृष्ण पक्ष की एकादशी पिछले मास में आती है: जैसे पापमोचनी वहाँ फाल्गुन कृष्ण की है। अधिक मास वाले वर्ष में पद्मिनी और परमा जुड़कर 26 एकादशियाँ होती हैं।

पूरे भारत में

एकादशी पूरे भारत में इसी नाम से रखी जाती है। महाराष्ट्र में आषाढ़ी एकादशी (देवशयनी) और कार्तिकी एकादशी (प्रबोधिनी) पंढरपुर वारी के बड़े दिन हैं, जब लाखों वारकरी पैदल विठ्ठल के दर्शन को जाते हैं। दक्षिण में धनु सौर मास (दिसंबर से जनवरी) की शुक्ल एकादशी, वैकुंठ एकादशी, पर श्रीरंगम और तिरुमला जैसे विष्णु मंदिरों में वैकुंठ द्वार खुलता है। देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू होता है, जो देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी पर पूरा होता है।

प्रश्न

एकादशी क्या है?

हर चंद्र पक्ष का ग्यारहवाँ दिन, भगवान विष्णु को समर्पित; वर्ष में 24 एकादशियाँ होती हैं, हर एक का अपना नाम (अधिक मास वाले वर्ष में 26)।

एकादशी का पालन कैसे करते हैं?

एकादशी पर अन्न का उपवास, विष्णु की पूजा, और अगली सुबह हरि वासर के बाद पारण के समय में उपवास खोलना।

अलग-अलग पंचांगों में एकादशी की तिथि अलग क्यों होती है?

हर पंचांग किसी एक स्थान के लिए गणना करता है: सूर्योदय (या चंद्रोदय, या शाम) के आसपास शुरू या समाप्त होने वाली तिथि अलग-अलग शहरों में अलग-अलग दिन पड़ सकती है। ये तिथियाँ दिखाए गए शहर के लिए हैं; ऊपर अपना शहर चुनें।

एकादशी को क्या खाया जाता है?

फल, दूध, मेवे और व्रत का भोजन जैसे साबूदाना, आलू और कुट्टू, राजगिरा या सिंघाड़े का आटा, सेंधा नमक के साथ। अन्न, सबसे पहले चावल, और दालें छोड़ी जाती हैं; कुछ लोग केवल जल पर या बिना जल (निर्जला) व्रत रखते हैं।

एकादशी का व्रत कब खोला जाता है?

अगले दिन द्वादशी को, पारण के समय: सूर्योदय के बाद, हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) बीत जाने पर, और द्वादशी समाप्त होने से पहले। यह समय स्थान के साथ बदलता है; तिथियों की तालिका में आपके शहर का समय है।

कुछ पंचांगों में एकादशी एक दिन बाद क्यों होती है?

जब एकादशी दो सूर्योदयों को छूती है, या दशमी भोर तक रहती है, तो पंचांगों में एक दिन का अंतर हो सकता है। यह पेज अधिकतर पंचांगों का स्मार्त नियम मानता है; इस्कॉन जैसे वैष्णव समुदाय प्रायः अगले दिन व्रत रखते हैं। अपने परिवार या मंदिर की परंपरा का पालन करें।

वर्ष में कितनी एकादशियाँ होती हैं?

चौबीस, हर चंद्र मास के दोनों पक्षों में एक-एक। अधिक मास वाले वर्ष में पद्मिनी और परमा एकादशी जुड़कर 26 होती हैं।

सबसे महत्वपूर्ण एकादशी कौन-सी है?

परंपरा में हर एकादशी प्रिय है, पर बिना जल रखी जाने वाली निर्जला एकादशी को सभी 24 का पुण्य देने वाली कहा जाता है, और देवशयनी व देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी चातुर्मास का आरंभ और अंत हैं।