एकादशी 2061 की तिथियाँ

हर चंद्र पक्ष का ग्यारहवाँ दिन, भगवान विष्णु को समर्पित; वर्ष में 24 एकादशियाँ होती हैं, हर एक का अपना नाम (अधिक मास वाले वर्ष में 26)।

नई दिल्ली, भारत के लिए तिथियाँ और समय

2061 में हर एकादशी

दिनांकनामतिथिपारण (अगले दिन)
रविवार, 2 जनवरी 2061पौष पुत्रदा एकादशी21:50, 1 जनवरी – 19:13, 2 जनवरी07:14 – 09:18
सोमवार, 17 जनवरी 2061षटतिला एकादशी14:10, 16 जनवरी – 16:34, 17 जनवरी07:14 – 09:21
सोमवार, 31 जनवरी 2061जया एकादशी · वैष्णव एकादशी: अगले दिन06:27, 31 जनवरी – 04:15, 1 फ़रवरी13:40 – 15:50
बुधवार, 16 फ़रवरी 2061विजया एकादशी11:03, 15 फ़रवरी – 12:23, 16 फ़रवरी06:57 – 09:12
बुधवार, 2 मार्च 2061आमलकी एकादशी14:53, 1 मार्च – 13:29, 2 मार्च06:43 – 09:03
गुरुवार, 17 मार्च 2061पापमोचनी एकादशी · वैष्णव एकादशी: अगले दिन05:22, 17 मार्च – 05:25, 18 मार्च13:41 – 16:06
गुरुवार, 31 मार्च 2061कामदा एकादशी00:06, 31 मार्च – 23:48, 31 मार्च06:10 – 08:40
शनिवार, 16 अप्रैल 2061वरूथिनी एकादशी20:18, 15 अप्रैल – 19:11, 16 अप्रैल05:53 – 08:28
शनिवार, 30 अप्रैल 2061मोहिनी एकादशी10:59, 29 अप्रैल – 11:55, 30 अप्रैल05:40 – 08:19
रविवार, 15 मई 2061अपरा एकादशी · वैष्णव एकादशी: अगले दिन07:48, 15 मई – 05:46, 16 मई13:39 – 16:22
रविवार, 29 मई 2061निर्जला एकादशी00:00, 29 मई – 01:56, 30 मई13:41 – 16:27
मंगलवार, 14 जून 2061योगिनी एकादशी16:18, 13 जून – 13:40, 14 जून05:22 – 08:10
मंगलवार, 28 जून 2061देवशयनी एकादशी15:00, 27 जून – 17:28, 28 जून05:26 – 08:13
बुधवार, 13 जुलाई 2061कामिका एकादशी22:35, 12 जुलाई – 19:43, 13 जुलाई05:32 – 08:18
गुरुवार, 28 जुलाई 2061पद्मिनी एकादशी · अधिक मास07:26, 27 जुलाई – 09:48, 28 जुलाई05:40 – 08:23
गुरुवार, 11 अगस्त 2061परमा एकादशी · अधिक मास03:46, 11 अगस्त – 01:05, 12 अगस्त06:24 – 08:27
शुक्रवार, 26 अगस्त 2061श्रावण पुत्रदा एकादशी00:34, 26 अगस्त – 02:19, 27 अगस्त13:39 – 16:13
शुक्रवार, 9 सितंबर 2061अजा एकादशी · वैष्णव एकादशी: अगले दिन09:13, 9 सितंबर – 07:12, 10 सितंबर13:32 – 16:02
रविवार, 25 सितंबर 2061पार्श्व एकादशी17:45, 24 सितंबर – 18:31, 25 सितंबर06:11 – 08:35
रविवार, 9 अक्टूबर 2061इंदिरा एकादशी16:27, 8 अक्टूबर – 15:32, 9 अक्टूबर06:18 – 08:38
मंगलवार, 25 अक्टूबर 2061पापांकुशा एकादशी10:21, 24 अक्टूबर – 10:00, 25 अक्टूबर06:28 – 08:43
सोमवार, 7 नवंबर 2061रमा एकादशी02:51, 7 नवंबर – 03:14, 8 नवंबर13:10 – 15:20
बुधवार, 23 नवंबर 2061देवउठनी एकादशी01:40, 23 नवंबर – 00:13, 24 नवंबर06:50 – 08:57
बुधवार, 7 दिसंबर 2061उत्पन्ना एकादशी17:06, 6 दिसंबर – 18:43, 7 दिसंबर07:01 – 09:06
शुक्रवार, 23 दिसंबर 2061मोक्षदा एकादशी14:56, 22 दिसंबर – 12:35, 23 दिसंबर07:10 – 09:14

कैसे रखा जाता है

एकादशी पर अन्न का उपवास, विष्णु की पूजा, और अगली सुबह हरि वासर के बाद पारण के समय में उपवास खोलना।

यह व्रत क्यों रखा जाता है

एकादशी वैष्णव परंपरा का सबसे अधिक रखा जाने वाला व्रत है। पद्म पुराण वर्ष की हर एकादशी को उसका अपना नाम और कथा देता है, जो श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई, और इस दिन को भगवान विष्णु का प्रिय बताता है। व्यवहार में यह महीने में दो बार संयम का दिन है: हल्का भोजन, अधिक प्रार्थना, और खान-पान व वाणी पर ध्यान।

व्रत की विधि, एक-एक चरण

  1. एक दिन पहले, दशमी को, सूर्यास्त से पहले एक बार हल्का भोजन, बिना चावल के।
  2. एकादशी को सुबह जल्दी स्नान, भगवान विष्णु या श्रीकृष्ण के सामने दीपक और फूल, और एक दिन पहले तोड़े गए तुलसी पत्र (परंपरा में एकादशी को तुलसी नहीं तोड़ी जाती)।
  3. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या विष्णु सहस्रनाम का जाप, और उस एकादशी की कथा पढ़ना या सुनना।
  4. सामर्थ्य के अनुसार दिन-रात उपवास; कई लोग रात को कीर्तन या भजन करते हैं।
  5. द्वादशी को पारण के समय व्रत खोला जाता है: सूर्योदय के बाद, हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) बीत जाने पर। आपके शहर का समय ऊपर की तालिका में है।

उपवास

परंपरा में एकादशी को अन्न, सबसे पहले चावल, और दालें छोड़ी जाती हैं। पूरा व्रत बिना जल (निर्जला) या केवल जल पर रखा जाता है; अधिकतर लोग फलाहार रखते हैं: फल, दूध, मेवे और व्रत का भोजन जैसे साबूदाना, आलू, और कुट्टू, राजगिरा या सिंघाड़े का आटा, सेंधा नमक के साथ। अपने स्वास्थ्य के अनुसार उपवास रखें: बच्चे, बुज़ुर्ग, गर्भवती महिलाएँ और अस्वस्थ लोग परंपरा से हल्का उपवास रखते हैं, और किसी बीमारी में पहले अपने डॉक्टर से पूछ लें।

वर्ष की 24 एकादशियाँ

मासकृष्ण पक्षशुक्ल पक्ष
चैत्रपापमोचनी एकादशीकामदा एकादशी
वैशाखवरूथिनी एकादशीमोहिनी एकादशी
ज्येष्ठअपरा एकादशीनिर्जला एकादशी
आषाढ़योगिनी एकादशीदेवशयनी एकादशी
श्रावणकामिका एकादशीश्रावण पुत्रदा एकादशी
भाद्रपदअजा एकादशीपार्श्व एकादशी
आश्विनइंदिरा एकादशीपापांकुशा एकादशी
कार्तिकरमा एकादशीदेवउठनी एकादशी
मार्गशीर्षउत्पन्ना एकादशीमोक्षदा एकादशी
पौषसफला एकादशीपौष पुत्रदा एकादशी
माघषटतिला एकादशीजया एकादशी
फाल्गुनविजया एकादशीआमलकी एकादशी
अधिक मासपरमा एकादशीपद्मिनी एकादशी

मास के नाम उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार हैं, जिसमें मास पूर्णिमा के बाद शुरू होता है। महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण के अमांत पंचांग में कृष्ण पक्ष की एकादशी पिछले मास में आती है: जैसे पापमोचनी वहाँ फाल्गुन कृष्ण की है। अधिक मास वाले वर्ष में पद्मिनी और परमा जुड़कर 26 एकादशियाँ होती हैं।

पूरे भारत में

एकादशी पूरे भारत में इसी नाम से रखी जाती है। महाराष्ट्र में आषाढ़ी एकादशी (देवशयनी) और कार्तिकी एकादशी (प्रबोधिनी) पंढरपुर वारी के बड़े दिन हैं, जब लाखों वारकरी पैदल विठ्ठल के दर्शन को जाते हैं। दक्षिण में धनु सौर मास (दिसंबर से जनवरी) की शुक्ल एकादशी, वैकुंठ एकादशी, पर श्रीरंगम और तिरुमला जैसे विष्णु मंदिरों में वैकुंठ द्वार खुलता है। देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू होता है, जो देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी पर पूरा होता है।

प्रश्न

एकादशी क्या है?

हर चंद्र पक्ष का ग्यारहवाँ दिन, भगवान विष्णु को समर्पित; वर्ष में 24 एकादशियाँ होती हैं, हर एक का अपना नाम (अधिक मास वाले वर्ष में 26)।

एकादशी का पालन कैसे करते हैं?

एकादशी पर अन्न का उपवास, विष्णु की पूजा, और अगली सुबह हरि वासर के बाद पारण के समय में उपवास खोलना।

अलग-अलग पंचांगों में एकादशी की तिथि अलग क्यों होती है?

हर पंचांग किसी एक स्थान के लिए गणना करता है: सूर्योदय (या चंद्रोदय, या शाम) के आसपास शुरू या समाप्त होने वाली तिथि अलग-अलग शहरों में अलग-अलग दिन पड़ सकती है। ये तिथियाँ दिखाए गए शहर के लिए हैं; ऊपर अपना शहर चुनें।

एकादशी को क्या खाया जाता है?

फल, दूध, मेवे और व्रत का भोजन जैसे साबूदाना, आलू और कुट्टू, राजगिरा या सिंघाड़े का आटा, सेंधा नमक के साथ। अन्न, सबसे पहले चावल, और दालें छोड़ी जाती हैं; कुछ लोग केवल जल पर या बिना जल (निर्जला) व्रत रखते हैं।

एकादशी का व्रत कब खोला जाता है?

अगले दिन द्वादशी को, पारण के समय: सूर्योदय के बाद, हरि वासर (द्वादशी का पहला चौथाई भाग) बीत जाने पर, और द्वादशी समाप्त होने से पहले। यह समय स्थान के साथ बदलता है; तिथियों की तालिका में आपके शहर का समय है।

कुछ पंचांगों में एकादशी एक दिन बाद क्यों होती है?

जब एकादशी दो सूर्योदयों को छूती है, या दशमी भोर तक रहती है, तो पंचांगों में एक दिन का अंतर हो सकता है। यह पेज अधिकतर पंचांगों का स्मार्त नियम मानता है; इस्कॉन जैसे वैष्णव समुदाय प्रायः अगले दिन व्रत रखते हैं। अपने परिवार या मंदिर की परंपरा का पालन करें।

वर्ष में कितनी एकादशियाँ होती हैं?

चौबीस, हर चंद्र मास के दोनों पक्षों में एक-एक। अधिक मास वाले वर्ष में पद्मिनी और परमा एकादशी जुड़कर 26 होती हैं।

सबसे महत्वपूर्ण एकादशी कौन-सी है?

परंपरा में हर एकादशी प्रिय है, पर बिना जल रखी जाने वाली निर्जला एकादशी को सभी 24 का पुण्य देने वाली कहा जाता है, और देवशयनी व देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी चातुर्मास का आरंभ और अंत हैं।