शारदीय नवरात्रि 2100: तिथि और पूजा मुहूर्त
शरद ऋतु में देवी की नौ रातें, आश्विन शुक्ल पक्ष के पहले दिन से।
नई दिल्ली, भारत के लिए तिथियाँ और समय
शारदीय नवरात्रि 2100
सोमवार, 4 अक्टूबर 2100 · घटस्थापना 06:15 – 08:37
आश्विन शुक्ल प्रतिपदा: 23:34, 3 अक्टूबर – 20:03, 4 अक्टूबर
शारदीय नवरात्रि की तिथियाँ 2100–2104
| वर्ष | तिथि और मुहूर्त |
|---|---|
| 2100 | सोमवार, 4 अक्टूबर 2100 · घटस्थापना 06:15 – 08:37 |
नई दिल्ली के लिए गणना। अपने शहर के लिए ऊपर शहर बदलें।
प्रमुख शहरों में शारदीय नवरात्रि 2100
| शहर | तिथि और मुहूर्त |
|---|---|
| नई दिल्ली | सोमवार, 4 अक्टूबर 2100 · घटस्थापना 06:15 – 08:37 |
| मुंबई | सोमवार, 4 अक्टूबर 2100 · घटस्थापना 06:29 – 08:52 |
| कोलकाता | सोमवार, 4 अक्टूबर 2100 · घटस्थापना 05:28 – 07:51 |
| चेन्नई | सोमवार, 4 अक्टूबर 2100 · घटस्थापना 05:58 – 08:21 |
| बेंगलुरु | सोमवार, 4 अक्टूबर 2100 · घटस्थापना 06:08 – 08:32 |
| हैदराबाद | सोमवार, 4 अक्टूबर 2100 · घटस्थापना 06:06 – 08:29 |
| पुणे | सोमवार, 4 अक्टूबर 2100 · घटस्थापना 06:25 – 08:48 |
| अहमदाबाद | सोमवार, 4 अक्टूबर 2100 · घटस्थापना 06:32 – 08:54 |
तिथि आमतौर पर पूरे भारत में एक ही होती है; मुहूर्त का समय हर शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से बदलता है।
यह क्या है
शरद ऋतु में देवी की नौ रातें, आश्विन शुक्ल पक्ष के पहले दिन से। महिषासुर पर दुर्गा की विजय का उत्सव; हर दिन उनके नौ रूपों में से एक को समर्पित है।
इसका महत्व
साल की मुख्य नवरात्रि: देवी की नौ रातें, जिनका समापन दशहरा पर होता है।
परंपरागत रूप से कैसे मनाया जाता है
पहली सुबह घटस्थापना, उपवास, कई राज्यों में गरबा और डांडिया, और अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन।
- पहली सुबह कलश स्थापना
- उपवास या सरल भोजन
- हर दिन दुर्गा के अलग रूप की पूजा
- जहाँ परंपरा हो, गरबा या डांडिया
- अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन
पूरे भारत में
पश्चिम बंगाल और असम में दुर्गा पूजा, गुजरात में गरबा, तमिलनाडु में गोलू, तेलंगाना में बतुकम्मा।
प्रश्न
2100 में शारदीय नवरात्रि कब है?
शारदीय नवरात्रि सोमवार, 4 अक्टूबर 2100 को है, शुक्ल प्रतिपदा तिथि के अनुसार; नई दिल्ली के लिए गणना।
शारदीय नवरात्रि पर घटस्थापना का समय क्या है?
नई दिल्ली के लिए: सोमवार, 4 अक्टूबर को 06:15 – 08:37। शहरों के बीच समय थोड़ा बदलता है।
शारदीय नवरात्रि क्या है?
शरद ऋतु में देवी की नौ रातें, आश्विन शुक्ल पक्ष के पहले दिन से। महिषासुर पर दुर्गा की विजय का उत्सव; हर दिन उनके नौ रूपों में से एक को समर्पित है।
शारदीय नवरात्रि परंपरागत रूप से कैसे मनाते हैं?
पहली सुबह घटस्थापना, उपवास, कई राज्यों में गरबा और डांडिया, और अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन।
पूरे भारत में शारदीय नवरात्रि कैसे मनाया जाता है?
पश्चिम बंगाल और असम में दुर्गा पूजा, गुजरात में गरबा, तमिलनाडु में गोलू, तेलंगाना में बतुकम्मा।