होलिका दहन 2100: तिथि और पूजा मुहूर्त
फाल्गुन पूर्णिमा की शाम का अलाव, होली से पहले की रात।
नई दिल्ली, भारत के लिए तिथियाँ और समय
होलिका दहन 2100
गुरुवार, 25 मार्च 2100 · होलिका दहन 20:24 – 20:55
फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा: 10:12, 25 मार्च – 06:36, 26 मार्च
होलिका दहन की तिथियाँ 2100–2104
| वर्ष | तिथि और मुहूर्त |
|---|---|
| 2100 | गुरुवार, 25 मार्च 2100 · होलिका दहन 20:24 – 20:55 |
नई दिल्ली के लिए गणना। अपने शहर के लिए ऊपर शहर बदलें।
प्रमुख शहरों में होलिका दहन 2100
| शहर | तिथि और मुहूर्त |
|---|---|
| नई दिल्ली | गुरुवार, 25 मार्च 2100 · होलिका दहन 20:24 – 20:55 |
| मुंबई | गुरुवार, 25 मार्च 2100 · होलिका दहन 20:24 – 21:12 |
| कोलकाता | गुरुवार, 25 मार्च 2100 · होलिका दहन 17:49 – 20:10 |
| चेन्नई | गुरुवार, 25 मार्च 2100 · होलिका दहन 20:24 – 20:42 |
| बेंगलुरु | गुरुवार, 25 मार्च 2100 · होलिका दहन 20:24 – 20:52 |
| हैदराबाद | गुरुवार, 25 मार्च 2100 · होलिका दहन 20:24 – 20:49 |
| पुणे | गुरुवार, 25 मार्च 2100 · होलिका दहन 20:24 – 21:08 |
| अहमदाबाद | गुरुवार, 25 मार्च 2100 · होलिका दहन 20:24 – 21:13 |
तिथि आमतौर पर पूरे भारत में एक ही होती है; मुहूर्त का समय हर शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से बदलता है।
यह क्या है
फाल्गुन पूर्णिमा की शाम का अलाव, होली से पहले की रात। यह प्रह्लाद की याद दिलाता है, जिनकी आस्था ने उन्हें उस आग में सुरक्षित रखा जिसमें होलिका जल गई।
इसका महत्व
अहंकार पर आस्था की जीत, जिसे होली की पूर्व संध्या पर होलिका दहन से याद किया जाता है।
परंपरागत रूप से कैसे मनाया जाता है
शाम के मुहूर्त में (परंपरा के अनुसार भद्रा के बाहर) अलाव जलाया जाता है, और अनाज, नारियल और उपलों की आहुति के साथ उसकी परिक्रमा।
- होलिका के लिए लकड़ी और उपले इकट्ठा करें
- रोली, चावल, फूल से पूजा करें और चारों ओर धागा लपेटें
- भद्रा से बचकर संध्या मुहूर्त में अग्नि प्रज्वलित करें
- अग्नि की परिक्रमा करें और नया अनाज अर्पित करें
- आशीर्वाद के रूप में राख घर ले जाएँ
पूरे भारत में
उत्तर में छोटी होली और दक्षिण के कुछ हिस्सों में कामदहन के नाम से जाना जाता है।
प्रश्न
2100 में होलिका दहन कब है?
होलिका दहन गुरुवार, 25 मार्च 2100 को है, शुक्ल पूर्णिमा तिथि के अनुसार; नई दिल्ली के लिए गणना।
होलिका दहन पर होलिका दहन का समय क्या है?
नई दिल्ली के लिए: गुरुवार, 25 मार्च को 20:24 – 20:55। शहरों के बीच समय थोड़ा बदलता है।
होलिका दहन क्या है?
फाल्गुन पूर्णिमा की शाम का अलाव, होली से पहले की रात। यह प्रह्लाद की याद दिलाता है, जिनकी आस्था ने उन्हें उस आग में सुरक्षित रखा जिसमें होलिका जल गई।
होलिका दहन परंपरागत रूप से कैसे मनाते हैं?
शाम के मुहूर्त में (परंपरा के अनुसार भद्रा के बाहर) अलाव जलाया जाता है, और अनाज, नारियल और उपलों की आहुति के साथ उसकी परिक्रमा।
पूरे भारत में होलिका दहन कैसे मनाया जाता है?
उत्तर में छोटी होली और दक्षिण के कुछ हिस्सों में कामदहन के नाम से जाना जाता है।