गुरु पूर्णिमा 2099: तिथि और पूजा मुहूर्त

आषाढ़ की पूर्णिमा, गुरु के सम्मान में।

नई दिल्ली, भारत के लिए तिथियाँ और समय

गुरु पूर्णिमा 2099

गुरुवार, 2 जुलाई 2099

आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा: 20:08, 1 जुलाई – 19:52, 2 जुलाई

गुरु पूर्णिमा 2100

बुधवार, 21 जुलाई 2100

आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा: 17:16, 20 जुलाई – 15:44, 21 जुलाई

गुरु पूर्णिमा की तिथियाँ 2099–2103

वर्षतिथि और मुहूर्त
2099गुरुवार, 2 जुलाई 2099
2100बुधवार, 21 जुलाई 2100

नई दिल्ली के लिए गणना। अपने शहर के लिए ऊपर शहर बदलें।

प्रमुख शहरों में गुरु पूर्णिमा 2099

शहरतिथि और मुहूर्त
नई दिल्लीगुरुवार, 2 जुलाई 2099
मुंबईगुरुवार, 2 जुलाई 2099
कोलकातागुरुवार, 2 जुलाई 2099
चेन्नईगुरुवार, 2 जुलाई 2099
बेंगलुरुगुरुवार, 2 जुलाई 2099
हैदराबादगुरुवार, 2 जुलाई 2099
पुणेगुरुवार, 2 जुलाई 2099
अहमदाबादगुरुवार, 2 जुलाई 2099

तिथि आमतौर पर पूरे भारत में एक ही होती है; मुहूर्त का समय हर शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से बदलता है।

यह क्या है

आषाढ़ की पूर्णिमा, गुरु के सम्मान में। यह व्यास पूर्णिमा भी है, जो वेदों के शिक्षक और महाभारत के रचयिता वेद व्यास की याद में है।

इसका महत्व

शिक्षकों और गुरुओं के प्रति कृतज्ञता का दिन, और महर्षि वेदव्यास का जन्मदिन।

परंपरागत रूप से कैसे मनाया जाता है

अपने शिक्षकों का सम्मान और उन्हें भेंट, व्यास की पूजा, और अध्ययन।

  1. अपने शिक्षकों से मिलें या उन्हें याद करें
  2. धन्यवाद के साथ फूल, फल या भेंट दें
  3. किसी धर्मग्रंथ या गुरु की शिक्षा का पाठ
  4. कोई साधना शुरू करें या दोहराएँ

पूरे भारत में

बौद्धों के लिए भी पवित्र, जो इस दिन बुद्ध के पहले उपदेश को याद करते हैं।

प्रश्न

2099 में गुरु पूर्णिमा कब है?

गुरु पूर्णिमा गुरुवार, 2 जुलाई 2099 को है, शुक्ल पूर्णिमा तिथि के अनुसार; नई दिल्ली के लिए गणना।

2100 में गुरु पूर्णिमा कब है?

गुरु पूर्णिमा बुधवार, 21 जुलाई 2100 को है, शुक्ल पूर्णिमा तिथि के अनुसार; नई दिल्ली के लिए गणना।

गुरु पूर्णिमा क्या है?

आषाढ़ की पूर्णिमा, गुरु के सम्मान में। यह व्यास पूर्णिमा भी है, जो वेदों के शिक्षक और महाभारत के रचयिता वेद व्यास की याद में है।

गुरु पूर्णिमा परंपरागत रूप से कैसे मनाते हैं?

अपने शिक्षकों का सम्मान और उन्हें भेंट, व्यास की पूजा, और अध्ययन।

पूरे भारत में गुरु पूर्णिमा कैसे मनाया जाता है?

बौद्धों के लिए भी पवित्र, जो इस दिन बुद्ध के पहले उपदेश को याद करते हैं।

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