दीवाली 2100: तिथि और पूजा मुहूर्त

रोशनी का त्योहार, कार्तिक (अमांत पंचांग में आश्विन) की अमावस्या को।

नई दिल्ली, भारत के लिए तिथियाँ और समय

दीवाली 2100

सोमवार, 1 नवंबर 2100 · लक्ष्मी पूजा 18:25 – 20:11

आश्विन कृष्ण अमावस्या (पूर्णिमांत कार्तिक): 12:36, 1 नवंबर – 08:46, 2 नवंबर

दीवाली की तिथियाँ 2100–2104

वर्षतिथि और मुहूर्त
2100सोमवार, 1 नवंबर 2100 · लक्ष्मी पूजा 18:25 – 20:11

नई दिल्ली के लिए गणना। अपने शहर के लिए ऊपर शहर बदलें।

प्रमुख शहरों में दीवाली 2100

शहरतिथि और मुहूर्त
नई दिल्लीसोमवार, 1 नवंबर 2100 · लक्ष्मी पूजा 18:25 – 20:11
मुंबईसोमवार, 1 नवंबर 2100 · लक्ष्मी पूजा 18:59 – 20:36
कोलकातासोमवार, 1 नवंबर 2100 · लक्ष्मी पूजा 17:51 – 19:31
चेन्नईसोमवार, 1 नवंबर 2100 · लक्ष्मी पूजा 18:38 – 20:10
बेंगलुरुसोमवार, 1 नवंबर 2100 · लक्ष्मी पूजा 18:49 – 20:21
हैदराबादसोमवार, 1 नवंबर 2100 · लक्ष्मी पूजा 18:39 – 20:14
पुणेसोमवार, 1 नवंबर 2100 · लक्ष्मी पूजा 18:55 – 20:32
अहमदाबादसोमवार, 1 नवंबर 2100 · लक्ष्मी पूजा 18:54 – 20:34

तिथि आमतौर पर पूरे भारत में एक ही होती है; मुहूर्त का समय हर शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से बदलता है।

यह क्या है

रोशनी का त्योहार, कार्तिक (अमांत पंचांग में आश्विन) की अमावस्या को। यह राम के अयोध्या लौटने का उत्सव है और समृद्धि की देवी लक्ष्मी का स्वागत करता है।

इसका महत्व

रोशनी का त्योहार: राम की अयोध्या वापसी, और साफ़-सुथरे, उजले घरों में लक्ष्मी के स्वागत की संध्या।

परंपरागत रूप से कैसे मनाया जाता है

घरों की सफ़ाई और दीपों से रोशनी, द्वार पर रंगोली, और शाम के (प्रदोष) मुहूर्त में लक्ष्मी पूजा।

  1. घर की सफ़ाई और सजावट; द्वार पर रंगोली
  2. घर के भीतर-बाहर दीये जलाएँ
  3. संध्या (प्रदोष) मुहूर्त में लक्ष्मी-गणेश पूजा
  4. मिठाई बाँटें और परिवार-मित्रों से मिलें
  5. परंपरा अनुसार रात भर एक दीप जलता रखें

पूरे भारत में

धनतेरस से भाई दूज तक पाँच दिन का पर्व; उसी रात पश्चिम बंगाल में काली पूजा होती है।

प्रश्न

2100 में दीवाली कब है?

दीवाली सोमवार, 1 नवंबर 2100 को है, कृष्ण अमावस्या तिथि के अनुसार; नई दिल्ली के लिए गणना।

दीवाली पर लक्ष्मी पूजा का समय क्या है?

नई दिल्ली के लिए: सोमवार, 1 नवंबर को 18:25 – 20:11। शहरों के बीच समय थोड़ा बदलता है।

दीवाली क्या है?

रोशनी का त्योहार, कार्तिक (अमांत पंचांग में आश्विन) की अमावस्या को। यह राम के अयोध्या लौटने का उत्सव है और समृद्धि की देवी लक्ष्मी का स्वागत करता है।

दीवाली परंपरागत रूप से कैसे मनाते हैं?

घरों की सफ़ाई और दीपों से रोशनी, द्वार पर रंगोली, और शाम के (प्रदोष) मुहूर्त में लक्ष्मी पूजा।

पूरे भारत में दीवाली कैसे मनाया जाता है?

धनतेरस से भाई दूज तक पाँच दिन का पर्व; उसी रात पश्चिम बंगाल में काली पूजा होती है।

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